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सुबोध भारती भाग 2 – तुम्हारी याद | प्रश्न उत्तर, सारांश और अभ्यास प्रश्न

 





1. तुम्हारी याद...


आइए, शुरू करें


सुबह हुई। चिड़ियों ने गीत गाए। कलियाँ-फूलों की सुगंध चारों ओर फैल गई। हे प्रभु! आपका धन्यवाद! आपने हमें इतना कुछ दिया। हमें आपकी बहुत याद आती है। आइए करें, यह प्रार्थना...


उच्चारण-अभ्यास:

चिड़ियाँ, कलियाँ, खुशबू, सिरजनहार, बूँदें, हरियाली


कविता


जब बहुत सुबह चिड़ियाँ उठकर

कुछ गीत खुशी के गाती हैं,

कलियाँ दरवाज़े खोल-खोल

जब दुनिया पर मुस्काती हैं।


खुशबू की लहरें जब घर से

बाहर आ दौड़ लगाती हैं,

हे जग के सिरजनहार प्रभो!

तब याद तुम्हारी आती है।


जब छम-छम बूँदें गिरती हैं,

बिजली चम-चम कर जाती है,

मैदानों में, वन-बागों में

जब हरियाली लहराती है।


जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से

मस्ती ठोकर लाती है,

हे जग के सिरजनहार प्रभो!

तब याद तुम्हारी आती है।


शब्दार्थ

खुशबू – सुगंध (Fragrance)

लहर – तरंग / धारा (Wave)

जग – संसार (World)

सिरजनहार – बनानेवाला (Maker / Creator)

वन – जंगल (Forest)

मस्ती – प्रसन्नता (Fun)

ठोकर – उठाकर ले जाना (To carry)



कविता का सारांश (तुम्हारी याद...)


यह कविता प्रकृति की सुंदरता के माध्यम से ईश्वर को याद करने की प्रेरणा देती है। कवि कहता है कि जब सुबह-सुबह चिड़ियाँ मधुर गीत गाती हैं, कलियाँ खिलती हैं और पूरी दुनिया मुस्कुराती हुई दिखाई देती है, तब सृष्टि के रचयिता प्रभु की याद आती है।


इसी प्रकार जब वर्षा की बूँदें गिरती हैं, बिजली चमकती है, खेतों और वनों में हरियाली छा जाती है तथा ठंडी-ठंडी हवा मन को आनंदित करती है, तब भी ईश्वर की महान शक्ति और उनकी कृपा का अनुभव होता है।


कविता का संदेश है कि प्रकृति का प्रत्येक सुंदर दृश्य हमें भगवान की याद दिलाता है। हमें उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें इतना सुंदर संसार और जीवन प्रदान किया है।


मुख्य संदेश:

प्रकृति की सुंदरता ईश्वर की महानता का प्रतीक है। हमें हर समय भगवान का धन्यवाद करना चाहिए और उनके प्रति श्रद्धा एवं प्रेम रखना चाहिए।



अभ्यास


मौखिक


1. सुबह उठकर चिड़ियाँ क्या करती हैं?

उत्तर: सुबह उठकर चिड़ियाँ खुशी के गीत गाती हैं।


2. इस दुनिया का सृजन करने वाले प्रभु की याद कवि को कब-कब आती है?

उत्तर: जब सुबह चिड़ियाँ गीत गाती हैं, कलियाँ मुस्कराती हैं, खुशबू फैलती है, वर्षा होती है, हरियाली लहराती है और ठंडी-ठंडी हवा चलती है, तब कवि को प्रभु की याद आती है।


3. कविता को याद करके सुनाइए।

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।


लिखित

प्रश्न 1. कवि प्रभु को क्यों याद कर रहे हैं?


उत्तर:

कवि प्रभु को इसलिए याद कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने यह सुंदर संसार बनाया है और प्रकृति की सुंदरता हमें उनकी याद दिलाती है।


प्रश्न 2. नीचे लिखे अर्थ वाली पंक्तियाँ कविता में से चुनकर लिखिए -


(क) नई-नई कलियाँ फूल बनकर इस संसार को सुंदर बनाती हैं।

उत्तर:

कलियाँ दरवाजे खोल-खोल

जब दुनिया पर मुस्काती हैं।


(ख) फूलों की खुशबू घर-बाहर सब जगह फैल जाती है।

उत्तर:

खुशबू की लहरें जब घर से

बाहर आ दौड़ लगाती हैं।


(ग) मैदान, वन और उपवन में चारों ओर हरियाली छा जाती है।

उत्तर:

मैदानों में, वन-बागों में

जब हरियाली लहराती है।


(घ) ठंडी-ठंडी हवा से सारे वातावरण में खुशी-मस्ती छा जाती है।

उत्तर:

जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से

मस्ती ठोकर लाती है।


प्रश्न 3. नीचे लिखे वाक्यों को कविता के अनुसार क्रम दीजिए -

सवेरे चिड़ियाँ गीत सुनाती हैं। (1)

कलियाँ मुस्कराती हैं। (2)

बिजली चमकती है। (3)

मैदानों में हरियाली लहराती है। (4)

ठंडी-ठंडी हवा चलती है। (5)


अर्थात्—


क. बिजली चमकती है। → 3

ख. कलियाँ मुस्कराती हैं। → 2

ग. ठंडी-ठंडी हवा चलती है। → 5

घ. सवेरे चिड़ियाँ गीत सुनाती हैं। → 1

ड़. मैदानों में हरियाली लहराती है। → 4



भाषा की बात


1. पढ़िए और याद कीजिए—


सुबह – सवेरा, भोर, प्रातः

खुशबू – सुवास, सुगंध, महक


हवा – वायु, समीर, पवन

जग – संसार, जगत, दुनिया


(यह केवल पढ़ने का अभ्यास है।)



2. समझकर लिखिए


चिड़िया → चिड़ियाँ

गुड़िया → गुड़ियाँ

लहर → लहरें

बूँद → बूँदें



3. कविता में से ‘अं’ और ‘ँ’ मात्राओं वाले दो-दो शब्द चुनकर बोलिए और लिखिए—


ु (उ की मात्रा):


खुशी

दुनिया


ू (ऊ की मात्रा):


सुबह

बूँदें



रचनात्मक गतिविधि


अपनी पाठशाला में होने वाली प्रार्थना अलग कागज़ पर लिखकर यहाँ चिपकाइए तथा शुद्ध उच्चारण के साथ गाइए।


आप इस पृष्ठ पर नीचे दी गई विद्यालय प्रार्थना लिखकर या अलग कागज़ पर लिखकर चिपका सकते हैं:


विद्यालय प्रार्थना


वह शक्ति हमें दो दयानिधे,

कर्तव्य मार्ग पर डट जाएँ।

पर सेवा पर उपकार में हम,

जग जीवन सफल बना जाएँ॥


हम दीन-दुखी निबलों के हित,

सेवा में जीवन लगा जाएँ।

जो हैं अटके, भूले-भटके,

उनको तारें, खुद तर जाएँ॥


या यदि आपके विद्यालय में कोई अलग प्रार्थना होती है, तो वही प्रार्थना लिखकर इस स्थान पर चिपकानी चाहिए।


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